निजीकरण को लेकर छिड़ी सियासी बहस
BUSINESS DESK : IDBI बैंक में सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) की हिस्सेदारी बेचने के फैसले को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार की विनिवेश नीति पर सवाल उठाए हैं। वहीं, केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कांग्रेस के कार्यकाल में बैंकों के प्रबंधन और कर्ज वितरण को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं।
राहुल गांधी ने बैंक कर्मचारियों का किया समर्थन
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर केंद्र सरकार के फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में देश के औद्योगिक विकास के लिए IDBI जैसे संस्थानों की स्थापना की गई थी, जबकि मौजूदा सरकार उनकी हिस्सेदारी बेच रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब IDBI बैंक पिछले वर्ष लगभग 9,000 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज कर चुका है, तो उसकी हिस्सेदारी बेचने की जरूरत क्यों पड़ रही है।
राहुल गांधी ने बैंक कर्मचारियों के विरोध का समर्थन करते हुए उनकी नौकरी की सुरक्षा, सेवा शर्तों और आरक्षण संबंधी अधिकारों पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक केवल आर्थिक संपत्ति नहीं, बल्कि देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले संस्थान हैं।
निर्मला सीतारमण ने कांग्रेस पर लगाए आरोप
राहुल गांधी के बयान के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पलटवार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के शासनकाल में राजनीतिक प्रभाव के चलते बैंकों पर कुछ बड़े कारोबारी समूहों को कर्ज देने का दबाव बनाया जाता था। सीतारमण ने वीडियोकॉन, किंगफिशर, विंसम डायमंड और ABG शिपयार्ड जैसे कारोबारी समूहों का उल्लेख करते हुए दावा किया कि पूर्व में दिए गए कई कर्ज बाद में गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (NPA) में बदल गए, जिससे IDBI बैंक को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।
वित्त मंत्री के अनुसार, केंद्र सरकार ने 25,000 करोड़ रुपये से अधिक की पूंजी सहायता और बेहतर प्रबंधन के जरिए बैंक की वित्तीय स्थिति सुधारने में योगदान दिया। उन्होंने दावा किया कि हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार पूरी की गई है।
करीब 52,878 करोड़ रुपये का सौदा
केंद्र सरकार ने 14 अक्टूबर 2026 को IDBI बैंक की 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी कनाडा की Fairfax Financial Holdings से जुड़ी कंपनी को बेचने की मंजूरी दी थी। इस सौदे में केंद्र सरकार की 30.48 प्रतिशत और LIC की 30.24 प्रतिशत हिस्सेदारी शामिल है। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, इस लेनदेन की कुल कीमत लगभग 52,878 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है।
2 और 3 नवंबर को कर्मचारियों की हड़ताल का ऐलान
IDBI बैंक के कर्मचारी संगठनों ने विनिवेश के विरोध में 2 और 3 नवंबर को हड़ताल करने का ऐलान किया है। कर्मचारी निजीकरण के बाद अपनी नौकरी, सेवा शर्तों और अन्य अधिकारों को लेकर चिंताएं जता रहे हैं। राहुल गांधी ने कर्मचारियों की मांगों का समर्थन किया है। दूसरी ओर, केंद्र सरकार का कहना है कि बैंक की रणनीतिक पुनर्गठन प्रक्रिया उसके भविष्य के विकास को ध्यान में रखकर आगे बढ़ाई गई है। फिलहाल IDBI बैंक की हिस्सेदारी बिक्री को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। आने वाले दिनों में कर्मचारी संगठनों के विरोध और सरकार के अगले कदमों पर नजर रहेगी।









