विदेशी निवेशकों को मिल सकती है राहत
BUSINESS DESK : भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेश को बढ़ावा देने और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) का भरोसा दोबारा मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार इक्विटी पर लगने वाले कैपिटल गेन्स टैक्स में बदलाव पर विचार कर सकती है। ग्लोबल निवेश बैंकिंग फर्म Jefferies ने अपनी रिपोर्ट में टैक्स व्यवस्था को आसान और प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए सरकार के सामने तीन संभावित विकल्प रखे हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार सभी निवेशकों के लिए लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) और शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स (STCG) टैक्स में कटौती कर सकती है। दूसरा विकल्प केवल विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के लिए LTCG टैक्स की दर कम करना है। तीसरे विकल्प के तहत विदेशी निवेशकों के मुनाफे की गणना अमेरिकी डॉलर में करने की व्यवस्था लागू की जा सकती है, जिससे उन्हें कुछ इंडेक्सेशन जैसा लाभ मिल सकता है।
अभी विदेशी निवेशकों पर कितना टैक्स लगता है?
Jefferies के अनुसार, भारत में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों पर फिलहाल दूसरे निवेशकों की तरह ही इक्विटी टैक्स लागू होता है। लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स पर 12.5 प्रतिशत और शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स पर 20 प्रतिशत टैक्स देना पड़ता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि कई उभरते बाजारों में विदेशी निवेशकों को इक्विटी से होने वाले लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स पर टैक्स में छूट मिलती है। ताइवान, अमेरिका, इंडोनेशिया और हांगकांग जैसे बाजारों में ऐसी व्यवस्था मौजूद है। भारत में पहले विदेशी निवेशक कुछ डबल टैक्सेशन अवॉइडेंस एग्रीमेंट (DTAA) के जरिए टैक्स में राहत ले पाते थे, लेकिन अप्रैल 2019 के बाद ऐसे विकल्प काफी सीमित हो गए।
टैक्स कटौती से रुपये और विदेशी निवेश को मिल सकता है सहारा
Jefferies का मानना है कि इक्विटी LTCG टैक्स में कमी से विदेशी निवेशकों का भरोसा बेहतर हो सकता है। इससे भारतीय शेयर बाजार में विदेशी पूंजी का प्रवाह बढ़ने और रुपये को समर्थन मिलने की संभावना है। रिपोर्ट में जून 2026 में सरकारी बॉन्ड में निवेश करने वाले कुछ पात्र विदेशी निवेशकों को दी गई टैक्स राहत का उदाहरण भी दिया गया है। इसके बाद जून-जुलाई के दौरान डेट मार्केट में करीब 9 अरब डॉलर का FPI निवेश आया था। Jefferies के मुताबिक, इक्विटी टैक्स में राहत मिलने पर भी निवेशकों की धारणा में सुधार हो सकता है।
सरकार के राजस्व पर भी पड़ेगा असर
टैक्स में कटौती का फैसला सरकार के लिए आसान नहीं होगा, क्योंकि इससे सरकारी राजस्व कम हो सकता है। Jefferies के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024-25 में इक्विटी LTCG टैक्स से करीब 1.3 लाख करोड़ रुपये की वसूली हुई थी। वहीं, चालू वित्त वर्ष में सरकार ने सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) से 73,700 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह वसूली 57,522 करोड़ रुपये रही थी। 1 अप्रैल से 14 अक्टूबर 2026 के बीच STT कलेक्शन लगभग 52 प्रतिशत बढ़कर 46,840 करोड़ रुपये पहुंच गया।
रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में इक्विटी LTCG टैक्स और STT का संयुक्त योगदान प्रत्यक्ष कर राजस्व का करीब 8 प्रतिशत और कुल सकल कर राजस्व का लगभग 5 प्रतिशत था। ऐसे में टैक्स दरों में कटौती से होने वाले संभावित नुकसान की भरपाई के लिए सरकार को दूसरे विकल्प भी तलाशने पड़ सकते हैं।
विदेशी निवेशकों को GST से भी राहत
केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) की ओर से जारी हालिया सर्कुलर के अनुसार, विदेशी ग्राहकों, जिनमें FPI, NRI और OCI शामिल हैं, को रिपैट्रिएबल भारतीय रुपये के खातों से दी जाने वाली ब्रोकरेज सेवाओं को निर्यात माना जाएगा। इस पर GST लागू नहीं होगा। Jefferies का कहना है कि इस फैसले से विदेशी निवेशकों के लिए भारत में निवेश की लागत कम हो सकती है। फिलहाल सरकार के सामने टैक्स सुधार के विकल्प हैं, लेकिन LTCG या STCG दरों में कटौती को लेकर कोई अंतिम सरकारी फैसला घोषित नहीं किया गया है।









