PUNJAB DESK : पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया पर किसी पेज या कंटेंट को ब्लॉक करने के मामले में पारदर्शिता को लेकर अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने निर्देश दिया है कि सरकार या अधिकृत अधिकारी जब किसी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को कंटेंट ब्लॉक करने के लिए नोटिस भेजें, तो उसकी कॉपी प्रभावित यूजर को भी तुरंत उपलब्ध कराई जाए। इससे संबंधित व्यक्ति को कार्रवाई के कारणों की जानकारी मिल सकेगी और उसे फैसले को चुनौती देने का उचित अवसर मिलेगा।
जस्टिस त्रिभुवन दहिया की अदालत ने यह निर्देश हरियाणा 24 न्यूज नेटवर्क प्राइवेट लिमिटेड की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। कंपनी का फेसबुक पेज 21 अगस्त 2026 को भारत में ब्लॉक कर दिया गया था। कंपनी ने अदालत में दलील दी कि उसे न तो पहले कोई सूचना दी गई और न ही हरियाणा पुलिस की ओर से मेटा को भेजे गए नोटिस की कॉपी उपलब्ध कराई गई।
क्या था पूरा मामला?
हरियाणा पुलिस ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 79(3)(b) के तहत मेटा को संचार भेजकर संबंधित फेसबुक पेज को ब्लॉक करने की कार्रवाई की थी। राज्य सरकार ने अदालत में कहा कि कंपनी का एक निदेशक आपराधिक मामले में आरोपी है और उस पर कथित तौर पर वीडियो तथा संदेशों के जरिए पीड़ित और गवाहों को डराने का आरोप था। हालांकि, हाईकोर्ट ने पाया कि संबंधित नोटिस ऐसे पुलिस अधिकारी की ओर से जारी किया गया था, जो लागू आईटी नियमों के तहत निर्धारित न्यूनतम रैंक की शर्त पूरी नहीं करता था। अदालत ने इस आधार पर नोटिस को अधिकार क्षेत्र से बाहर मानते हुए रद्द कर दिया।
कंटेंट ब्लॉक करने के कारण बताना जरूरी
अदालत ने स्पष्ट किया कि प्रभावित यूजर को सरकारी नोटिस की जानकारी दिए बिना उसके लिए कार्रवाई को प्रभावी ढंग से चुनौती देना मुश्किल होगा। सूचना प्रौद्योगिकी (इंटरमीडियरी दिशानिर्देश एवं डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 के नियम 3(2) में भले ही नोटिस भेजने से पहले यूजर को सूचना देने का स्पष्ट प्रावधान नहीं है, लेकिन अदालत के अनुसार निष्पक्ष सुनवाई के सिद्धांतों के तहत नोटिस की कॉपी यूजर को उपलब्ध कराना जरूरी है। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की शिकायत निवारण व्यवस्था का लाभ तभी प्रभावी हो सकता है, जब प्रभावित व्यक्ति को यह पता हो कि उसके खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है और उसके पीछे क्या आधार हैं।
24 घंटे में फेसबुक पेज बहाल करने का निर्देश
हाईकोर्ट ने संबंधित नोटिस को रद्द करते हुए निर्देश दिया कि अदालत के आदेश की प्रमाणित प्रति मिलने के 24 घंटे के भीतर हरियाणा 24 न्यूज नेटवर्क के फेसबुक पेज को उसकी मूल स्थिति में बहाल करने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में किसी कंटेंट को कानून के तहत प्रतिबंधित पाए जाने पर ब्लॉक करने की जरूरत होती है, तो संबंधित नोटिस अधिकृत अधिकारी द्वारा जारी किया जाना चाहिए और उसकी कॉपी प्रभावित यूजर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को नोटिस भेजे जाने के तुरंत बाद उपलब्ध कराई जानी चाहिए। यह फैसला सोशल मीडिया कंटेंट पर सरकारी रोक लगाने की प्रक्रिया में कानूनी अधिकार, पारदर्शिता और निष्पक्ष सुनवाई के महत्व को रेखांकित करता है।









