आंध्र प्रदेश में ₹1 लाख करोड़ का ग्लोबल हॉर्टिकल्चर हब, रायलसीमा को फल उत्पादन का अंतरराष्ट्रीय केंद्र बनाने की तैयारी

BUSINESS DESK : आंध्र प्रदेश के सूखाग्रस्त रायलसीमा क्षेत्र को बागवानी और फल उत्पादन के वैश्विक केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए ₹1 लाख करोड़ की लागत से ग्लोबल हॉर्टिकल्चर हब स्थापित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अन्नामय्या जिले के मदनपल्ले में इस महत्वाकांक्षी परियोजना की आधारशिला रखी। कार्यक्रम में रिलायंस इंडस्ट्रीज के कार्यकारी निदेशक अनंत अंबानी भी मौजूद रहे। इस दौरान इंडियन स्कूल ऑफ एग्रीकल्चर की भी नींव रखी गई।

इस परियोजना के तहत रायलसीमा के 10 जिलों के 5,860 गांवों को 201 क्लस्टर में शामिल किया जाएगा। इसके माध्यम से करीब 6 लाख एकड़ अतिरिक्त भूमि पर बागवानी का विस्तार करने की योजना है। सरकार का लक्ष्य खेती, सिंचाई, खाद्य प्रसंस्करण, भंडारण, परिवहन और निर्यात को एकीकृत कर किसानों के लिए नए अवसर तैयार करना है।

₹1 लाख करोड़ की परियोजना में सरकारी और निजी निवेश

मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के अनुसार, ग्लोबल हॉर्टिकल्चर हब को एक ऐसे इकोसिस्टम के रूप में विकसित किया जाएगा, जिसमें खेती से लेकर उत्पादों की मार्केटिंग और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच की व्यवस्था शामिल होगी। इस परियोजना में करीब ₹40,000 करोड़ का सरकारी निवेश प्रस्तावित है, जबकि लगभग ₹60,000 करोड़ का निजी निवेश जुटाने की योजना है। इसके तहत आधुनिक कृषि तकनीक, प्रोसेसिंग यूनिट, कोल्ड स्टोरेज और निर्यात से जुड़ी सुविधाओं का विकास किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य किसानों को बड़े बाजारों से जोड़ना और उनकी उपज के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है।

रायलसीमा में सेब, कीवी और एवोकाडो की खेती पर जोर

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री नायडू ने कहा कि उचित सिंचाई और बाजार की सुविधा मिलने पर रायलसीमा में बागवानी की व्यापक संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के किसान सेब, स्ट्रॉबेरी, केला, एवोकाडो, कीवी और खजूर जैसी फसलों की खेती कर सकते हैं। मुख्यमंत्री के मुताबिक, रायलसीमा को ग्लोबल फ्रूट बाउल के रूप में विकसित करने की दिशा में यह परियोजना एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के सहयोग का भी उल्लेख किया। नायडू ने कहा कि सिंचाई और प्रभावी मार्केटिंग व्यवस्था से किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य हासिल करने में मदद मिल सकती है।

‘सीड टू शिपमेंट’ मॉडल से जुड़ेगी पूरी सप्लाई चेन

इस परियोजना को ‘सीड टू शिपमेंट’ मॉडल पर विकसित करने की योजना है। इसके तहत बीज बोने से लेकर फसल की पैदावार, प्रोसेसिंग, कोल्ड स्टोरेज, परिवहन और विदेशों में निर्यात तक की पूरी प्रक्रिया को आपस में जोड़ा जाएगा। खेती में पानी की बचत और उत्पादन बढ़ाने के लिए ड्रिप इरिगेशन को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित तकनीक और आधुनिक कृषि प्रणालियों का इस्तेमाल करने की योजना है, ताकि मौसम और जलवायु से जुड़े जोखिमों का बेहतर प्रबंधन किया जा सके।

सिंचाई परियोजनाओं पर ₹35,000 करोड़ खर्च करने की योजना

रायलसीमा में पानी की समस्या को दूर करने के लिए राज्य सरकार ने सिंचाई से जुड़ी योजनाओं को भी प्राथमिकता दी है। मुख्यमंत्री ने हंद्री-नीवा और गालेरू-नगरी जैसी प्रमुख परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इन्हें आगे बढ़ाया जा रहा है। सरकार की योजना ₹35,000 करोड़ की लागत से 36 प्रमुख सिंचाई परियोजनाओं को तीन वर्षों में पूरा करने की है। इसके अलावा नदियों को जोड़ने, जल हस्तांतरण और पोलावरम परियोजना को पूरा करने पर भी जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन प्रयासों का उद्देश्य कृषि और पेयजल के लिए पानी की उपलब्धता को मजबूत करना है।

अनंत अंबानी बोले- मुझे आंध्र प्रदेश का बेटा समझें

कार्यक्रम में अनंत अंबानी ने इस परियोजना का हिस्सा बनने के लिए राज्य सरकार का आभार जताया। उन्होंने कहा कि रिलायंस इंडस्ट्रीज को इंडियन स्कूल ऑफ एग्रीकल्चर के लिए आंध्र प्रदेश के साथ साझेदारी करने पर गर्व है और संस्थान को पूरा सहयोग दिया जाएगा। अनंत अंबानी ने कहा कि उन्हें आंध्र प्रदेश का बेटा समझा जाए और राज्य के विकास में योगदान देने के लिए उनका मार्गदर्शन किया जाए। उन्होंने राज्य के लोगों की सेवा और हरसंभव मदद के लिए तैयार रहने की बात भी कही। इस पर मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि आज से अनंत अंबानी को आंध्र प्रदेश का बेटा माना जाएगा।

इंडियन स्कूल ऑफ एग्रीकल्चर में होगी आधुनिक खेती पर रिसर्च

 मदनपल्ले में रिलायंस के सहयोग से स्थापित किए जा रहे इंडियन स्कूल ऑफ एग्रीकल्चर का उद्देश्य कृषि शिक्षा, अनुसंधान और आधुनिक तकनीक को बढ़ावा देना है। यहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, प्रिसिजन फार्मिंग, एग्री-बिजनेस और जलवायु अनुकूल खेती जैसे क्षेत्रों में अध्ययन और शोध किया जाएगा।मुख्यमंत्री के अनुसार, यह संस्थान कृषि अनुसंधान और किसानों की जरूरतों के बीच तालमेल बनाने में मदद करेगा। इसके जरिए नई तकनीकों को खेतों तक पहुंचाने और कृषि क्षेत्र के लिए प्रशिक्षित विशेषज्ञ तैयार करने पर ध्यान दिया जाएगा। ग्लोबल हॉर्टिकल्चर हब और इंडियन स्कूल ऑफ एग्रीकल्चर को रायलसीमा में कृषि आधारित विकास को गति देने वाली पहलों के रूप में प्रस्तुत किया गया है। परियोजना के जरिए खेती, प्रसंस्करण और निर्यात को एक साथ जोड़कर क्षेत्र में रोजगार और निवेश के अवसर बढ़ाने की योजना है।

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