रमन अरोड़ा के साथ कई कामों में भागीदारी रखने वाले तहसीलदार पर गिर सकती है गाज !

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मिलीभगत से फर्जी मुख्तियारनामे के आधार पर रजिस्ट्री करके 35 मरले कोठी पर कब्ज़ा करने में साथ देने के लगे गंभीर आरोप

डीजीपी के पास पहुंची शिकायत, एडीसीपी (हैडक्वार्टर) करेंगे जांच

 

जालंधर, 20 जून : अपनी तैनाती की शुरूआत से ही विवादों के साथ चोली-दामन का साथ बनाए रखने वाले तहसीलदार मनिंदर सिंह सिद्दू के ऊपर किसी भी समय गाज गिर सकती है। क्योंकि इस बार जिस मामले में डीजीपी पंजाब के पास शिकायत दर्ज करवाई गई है, उसके ऊपर न केवल पुलिस, विजीलैंस व सरकार बल्कि प्रदेश की जनता भी पैनी नज़र बनाए बैठी है। क्योंकि इस शिकायत का सीधा संबध आप के धनप्रतिनिधि विधायक रमन अरोड़ा व उनके समधि राजू मदान के साथ जुड़ा हुआ है।

इस शिकायत में तहसीलदार के ऊपर सबकुछ जानते हुए मिलीभगत करके एक जाली मुख्तियारनामा रजिस्ट्र्ड करने के बेहद गंभीर आरोप लगे हैं। जिसके आधार पर करोड़ों रूपए कीमत वाली एक 25 मरले की कोठी पर कब्ज़ा किया गया है। अब इस जाली मुख्तियारनामे एवं फर्जीवाड़ा करने व साथ देने वाले सभी लोगों के खिलाफ गहन पड़ताल होगी और दोषी पाए जाने पर कड़ी कारवाई भी की जाएगी। इस शिकायत में यह भी जांचा जाएगा कि तहसीलदार की इस पूरे मामले में कोई भूमिका है या नहीं और अगर उन्हें मिलीभगत का दोषी पाया जाता है, तो उनके खिलाफ गाज गिरना तय है।

क्या है शिकायत, कैसे हुई जालसाजी

सुल्तानपुर लोधी निवासी वासु पाठक ने डीजीपी को दी शिकायत में लिखा है कि रिश्वतखोर भ्रष्टाचारी एमएलए रमन अरोड़ा ने अपने समधी राजू मदान और बेटे राजन अरोड़ा एवं जालंधर के तहसीलदार मनिंदर सिंह सिद्दू के साथ मिलकर वाक्या आबादी न्यू कालोनी, नज़दीक मोता सिंह नगर, बसंत विहार रोड जालंधर में खसरा नं 29929/5014(1-15) सालम हिस्सा रकबा 35 मरले पैमाईश 207 वर्ग फुट के फर्ज़ी-झूठा मुख्तियारनामा नकली बनाकर करोड़ो रूपए की ज़मीन के ऊपर कब्ज़ा किया है। दोषियों के खिलाफ मुकदम्मा दर्ज करके कारवाई की जाए।

नंबरदार की गवाही पर भी उठ रहे सवाल

इस मामले में एक और बात जो सामने आ रही है, वह यह है कि इस तथाकथित जाली मुख्तियारनामे पर जिस नंबरदार ने गवाही जाली है, वह लंबे समय से विवादों के साथ घिरा हुआ है। इस नंबरदार को कई दागी अधिकारियों का चहेता व राज़दार बताया जाता है। सब-रजिस्ट्रार जालंधर-1 में दस्तावेज़ों पर डलने वाली गवाही की अगर बात की जाए, तो लगभग 60 से 70 प्रतिशत दस्तावेज़ों पर इसी नंबरदार की गवाही डली होती है। इसलिए पुलिस की जांच में इस नंबरदार द्वारा डाली गई गवाही को लेकर भी जांच की जाएगी।

ऊंची पहुंच व तगड़ी सैटिंग के दम पर हर बार दबा देते हैं अपने खिलाफ आई शिकायतें

वैसे विवादित तहसीलदार के खिलाफ यह पहली शिकायत नहीं हुई है। इससे पहले भी दर्जनों से अधिक शिकायतें इनके खिलाफ आती रही हैं। मगर हर बार अपनी ऊंची पहुंच, तगड़ी सैटिंग व पैसों की ताकत से यह अपने खिलाफ आई हर शिकायत को दबाने में सफल रहे हैं। अब देखना होगा कि प्रदेश सरकार द्वारा करप्शन के प्रति अपनाई गई नो-टौलरैंस नीति के चलते क्या यह इस बार भी अपने किए गलत कामों से बच पाते हैं या फिर इनको सज़ा मिलती है।

 

मैंने कुछ गलत नहीं किया, मेरा काम केवल दस्तावेज़ रजिस्टर्ड करना – मनिंदर सिद्दू

तहसीलदार शाहकोट मनिंदर सिद्दू जिनके खिलाफ डीजीपी के पास शिकायत की गई है, उनका कहना है कि वह नहीं जानते कि मुख्तियारनामा असली था या जाली। उनका काम तो केवल दस्तावेज़ रजिस्टर्ड करना है, और वह इसे मना नहीं कर सकते। उनकी विधायक रमन अरोड़ा या किसी अन्य व्यक्ति से कोई लेना-देना नहीं है।

 

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Author: United Punjab

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