केरल कांग्रेस के सभी पदाधिकारियों को अवमानना नोटिस
NATIONAL DESK : भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत को निशाना बनाकर सोशल मीडिया पर की गई एक विवादित पोस्ट के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) के अध्यक्ष सहित सभी पदाधिकारियों को नोटिस जारी कर पूछा है कि उनके खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए। जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने शुक्रवार को इस मामले की सुनवाई की। अदालत ने स्पष्ट किया कि संविधान सर्वोच्च है और कोई भी व्यक्ति या राजनीतिक संगठन इससे ऊपर नहीं है।
12 अक्टूबर को कांग्रेस के आधिकारिक X अकाउंट से हुई थी पोस्ट
यह पूरा विवाद 12 अक्टूबर 2026 को कांग्रेस की केरल इकाई के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से प्रकाशित एक पोस्ट के बाद शुरू हुआ था। पोस्ट में CJI सूर्यकांत को संबोधित करते हुए उनके इस्तीफे की मांग की गई थी और कहा गया था कि यदि कानून-व्यवस्था उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है, तो उन्हें पद छोड़ देना चाहिए। पोस्ट सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसकी आलोचना हुई। विवाद बढ़ने पर इसे हटा दिया गया। इसके बाद अधिवक्ता विनीत जिंदल ने सुप्रीम कोर्ट से मामले में कार्रवाई की मांग की थी।
कांग्रेस ने मांगी बिना शर्त माफी
सुनवाई के दौरान केरल कांग्रेस की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि विवादित पोस्ट पार्टी के पदाधिकारियों की जानकारी या मंजूरी के बिना अपलोड की गई थी। पार्टी ने पोस्ट हटाने और इसके लिए बिना शर्त माफी मांगने की जानकारी भी दी। कांग्रेस की ओर से यह भी कहा गया कि पोस्ट प्रकाशित करने के लिए जिम्मेदार व्यक्ति को उसकी जिम्मेदारी से हटा दिया गया है। इस पर जस्टिस अरविंद कुमार ने टिप्पणी की कि अदालत यह देखेगी कि माफी केवल लिखित रूप में दी गई है या वास्तव में दिल से मांगी गई है।
अदालत बोली- अभिव्यक्ति की आजादी न्यायपालिका को डराने का माध्यम नहीं
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने न्यायपालिका की स्वतंत्रता और संवैधानिक व्यवस्था पर जोर दिया। पीठ ने कहा कि न्यायिक फैसलों की आलोचना की जा सकती है, लेकिन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का इस्तेमाल न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने या अदालत को डराने के लिए नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह भी कहा कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता किसी राजनीतिक सुविधा का विषय नहीं है। न्यायिक संयम को संस्थागत कमजोरी नहीं समझा जाना चाहिए और अदालत की गरिमा को कमजोर करने के प्रयासों से सख्ती से निपटना जरूरी है।
अटॉर्नी जनरल से भी मांगी सहायता
सुप्रीम कोर्ट ने मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद दातार और सिद्धार्थ अग्रवाल को न्याय मित्र (Amicus Curiae) के रूप में नियुक्त करने की संभावना जताई है, ताकि वे अदालत को यह समझने में मदद कर सकें कि मामले में दीवानी या आपराधिक अवमानना की कार्यवाही बनती है या नहीं। अदालत ने अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी से भी सहायता मांगी है। पीठ ने केरल कांग्रेस के अध्यक्ष और सचिव सहित सभी पदाधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। हालांकि, इस चरण पर अदालत ने मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम राय नहीं दी है और पदाधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से पेश होने से छूट दी है।









