पंजाब की सियासत में बड़ा बदलाव: प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा की अकाली दल में वापसी

बेटे हरिंदरपाल ने भी थामा पार्टी का दामन

PUNJAB DESK : पंजाब की राजनीति में शिरोमणि अकाली दल को उस समय अहम मजबूती मिली, जब वरिष्ठ अकाली नेता और पूर्व सांसद प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा ने एक बार फिर पार्टी में वापसी कर ली। उनके साथ उनके बेटे और पूर्व विधायक हरिंदरपाल सिंह चंदूमाजरा भी अकाली दल में शामिल हुए। पार्टी अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने पटियाला में चंदूमाजरा परिवार का स्वागत किया।

पंथक एकता को बताया वापसी का प्रमुख कारण

अकाली दल में लौटने के फैसले को लेकर प्रो. चंदूमाजरा ने पंजाब और पंथ के हितों का हवाला दिया। उनका कहना है कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में अकाली दल के अलग-अलग धड़ों का एकजुट होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि पंजाब के हितों की रक्षा के लिए सभी अकाली और पंथक संगठनों को साझा मंच पर आकर काम करना चाहिए। उन्होंने 2 दिसंबर के श्री अकाल तख्त साहिब के हुकमनामे का जिक्र करते हुए कहा कि उसका उद्देश्य अकाली दल को बांटना नहीं, बल्कि एकजुट करना था।

अकाली दल पुनर सुरजीत से क्यों हुए अलग?

प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा ने 4 नवंबर को शिरोमणि अकाली दल (पुनर सुरजीत) से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने इस फैसले के पीछे पार्टी नेतृत्व के साथ विचारधारा, काम करने के तरीके और पंथक एकता को लेकर मतभेदों को वजह बताया था। उनका मानना था कि पंजाब और पंथक हितों के लिए सभी अकाली धड़ों को एक मंच पर लाने की जरूरत है। हालांकि, इस मुद्दे पर धड़े के अध्यक्ष ज्ञानी हरप्रीत सिंह के साथ उनकी सहमति नहीं बन पाई। इसके बाद उन्होंने अलग रास्ता चुनने का फैसला किया।

2024 में छोड़ी थी मूल पार्टी

गौरतलब है कि वर्ष 2024 में लोकसभा चुनाव के बाद अकाली दल के भीतर नेतृत्व को लेकर असंतोष बढ़ा था। इसके बाद प्रो. चंदूमाजरा सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने सुखबीर सिंह बादल की अगुवाई पर सवाल उठाए थे। बाद में वह अकाली दल से अलग हुए और बागी नेताओं के साथ अकाली दल पुनर सुरजीत से जुड़ गए थे। इस धड़े का नेतृत्व पूर्व अकाल तख्त जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह कर रहे थे। अब करीब दो साल बाद प्रो. चंदूमाजरा की मूल अकाली दल में वापसी को पंजाब की आगामी राजनीतिक रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

बेटे हरिंदरपाल सिंह लड़ेंगे सनौर से चुनाव

प्रो. चंदूमाजरा ने आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर अपना रुख भी स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा कि वह खुद चुनाव नहीं लड़ेंगे, बल्कि उनके बेटे हरिंदरपाल सिंह चंदूमाजरा सनौर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव मैदान में उतरेंगे। पिता-पुत्र की वापसी से पटियाला और आसपास के क्षेत्रों में अकाली दल की राजनीतिक गतिविधियों को नई दिशा मिलने की संभावना है।

अकाली राजनीति में एकजुटता की कोशिश तेज

2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले अकाली दल के अलग-अलग धड़ों को एक साथ लाने की कोशिशें तेज हो गई हैं। प्रो. चंदूमाजरा की वापसी को इसी दिशा में एक अहम घटनाक्रम माना जा रहा है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि उनके लौटने के बाद अन्य अलग हुए नेता भी अकाली दल में वापसी करते हैं या नहीं।

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