पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का अहम फैसला
PUNJAB DESK : संतान प्राप्ति के लिए IVF उपचार करवाने की इच्छा रखने वाले दंपतियों को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण कानूनी स्थिति स्पष्ट की है। अदालत ने कहा है कि यदि महिला की उम्र 50 वर्ष से कम है, तो वह अपने पति की उम्र 55 वर्ष से अधिक होने के बावजूद असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (ART) सेवाओं का लाभ स्वतंत्र रूप से उठा सकती है।
जस्टिस त्रिभुवन दहिया ने छह याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि ART कानून के तहत पुरुषों और महिलाओं के लिए निर्धारित आयु सीमा अलग-अलग लागू होती है। महिला की पात्रता केवल इस आधार पर समाप्त नहीं हो सकती कि उसके पति ने निर्धारित आयु सीमा पार कर ली है।
ART कानून में महिला और पुरुष के लिए अलग आयु सीमा
अदालत ने असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (रेगुलेशन) एक्ट, 2021 की व्याख्या करते हुए बताया कि इस कानून के तहत 21 वर्ष से अधिक और 50 वर्ष से कम उम्र की महिला ART सेवाएं ले सकती है। वहीं पुरुष के लिए निर्धारित आयु सीमा 21 वर्ष से अधिक और 55 वर्ष से कम है।
हाईकोर्ट के अनुसार, कानून महिला और पुरुष की पात्रता को अलग-अलग देखता है। इसलिए यदि महिला निर्धारित उम्र के दायरे में है, तो वह अपने पति की उम्र सीमा पार होने के बावजूद स्वतंत्र रूप से उपचार के लिए आवेदन कर सकती है।
छह याचिकाओं पर सुनवाई के बाद आया फैसला
इस मामले में अदालत के सामने छह याचिकाएं आई थीं, जिनमें IVF और अन्य ART सेवाएं हासिल करने में उम्र संबंधी नियमों को लेकर सवाल उठाए गए थे।
एक प्रमुख मामले में दंपति ने नवंबर 2023 में IVF प्रक्रिया के दौरान नौ भ्रूण तैयार करवाकर सुरक्षित रखे थे। उस समय दोनों की उम्र 47 वर्ष थी। बाद में दो बार भ्रूण प्रत्यारोपण की कोशिश हुई, लेकिन गर्भावस्था आगे नहीं बढ़ सकी। महिला की उम्र 10 दिसंबर 2025 को 50 वर्ष हो गई थी और चार भ्रूण सुरक्षित बचे थे। दंपति ने इन भ्रूणों के इस्तेमाल की अनुमति मांगी थी। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि निर्धारित उम्र सीमा पार करने के बाद केवल पहले से भ्रूण सुरक्षित रखे होने के आधार पर आगे की प्रक्रिया जारी रखने का स्वतः अधिकार नहीं मिल जाता।
महिला को स्वतंत्र रूप से ART सेवाएं लेने का अधिकार
हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि ART कानून के तहत महिला को अपनी अलग कानूनी पहचान के आधार पर उपचार लेने का अधिकार दिया गया है। यह अधिकार केवल विवाहित महिलाओं तक सीमित नहीं है। अदालत के अनुसार, यदि महिला की उम्र 50 वर्ष से कम है, तो वह अपने पति की उम्र 55 वर्ष से अधिक होने पर भी स्वतंत्र रूप से ART सेवाओं का विकल्प चुन सकती है। हालांकि, महिला स्वयं निर्धारित अधिकतम आयु सीमा पार कर चुकी है, तो यह राहत उस पर लागू नहीं होगी।
IVF उपचार को लेकर उम्र संबंधी नियमों पर अहम स्पष्टीकरण
इस फैसले से ART सेवाएं लेने की इच्छुक महिलाओं के लिए कानूनी स्थिति अधिक स्पष्ट हुई है। अदालत ने दोहराया कि महिला और पुरुष की आयु सीमा को अलग-अलग आधार पर लागू किया जाना चाहिए, न कि दोनों की उम्र को एक संयुक्त पात्रता मानकर। फैसले के बाद छह याचिकाओं का निपटारा कर दिया गया। यह निर्णय उन मामलों में महत्वपूर्ण है, जहां पति की उम्र निर्धारित सीमा से अधिक होने के कारण महिला को IVF या अन्य ART सेवाएं देने से इनकार किया जा रहा था।









