2 करोड़ की सहायता सहित कई मांगें स्वीकार
PUNJAB DESK : पंजाब के मानसा में परविंदर सिंह झोटा की मौत के बाद परिवार और प्रशासन के बीच चला आ रहा विवाद अब बातचीत के जरिए सुलझता नजर आ रहा है। सरकार की ओर से परिवार की प्रमुख मांगों पर सहमति जताए जाने के बाद परिजनों ने पोस्टमार्टम करवाने और अंतिम संस्कार करने का फैसला लिया है। इस संबंध में मानसा में सरकार के प्रतिनिधियों, परिवार और इंसाफ कमेटी के सदस्यों के बीच बैठक हुई। बातचीत में विधानसभा स्पीकर कुलतार सिंह संधवां और कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां भी शामिल हुए। बैठक के बाद परिवार को आर्थिक सहायता और अन्य मांगों पर सरकार की ओर से आश्वासन दिया गया।
परिवार को आर्थिक मदद और पत्नी को नौकरी देने का भरोसा
समझौते के तहत पंजाब सरकार ने परविंदर सिंह झोटा के परिवार को 2 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। इसके अलावा उनकी पत्नी को सरकारी नौकरी देने की बात भी स्वीकार की गई है। परिवार की मांग पर मानसा में सरकारी जमीन पर झोटा की प्रतिमा स्थापित करने और ख्याला कलां गांव में प्रस्तावित ट्रॉमा सेंटर का नाम उनके नाम पर रखने का आश्वासन भी दिया गया है।
चंडीगढ़ के डॉक्टरों की टीम करेगी पोस्टमार्टम
परिवार की सहमति के बाद पोस्टमार्टम की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया। इसके लिए चंडीगढ़ स्थित PGIMER के वरिष्ठ डॉक्टरों की टीम से पोस्टमार्टम करवाने की बात सामने आई है। प्रक्रिया पूरी होने के बाद परिवार धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार अंतिम संस्कार करेगा। गौरतलब है कि 13 अक्टूबर को हुई घटना के बाद से झोटा का शव मानसा सिविल अस्पताल की मोर्चरी में रखा हुआ था। परिवार अपनी मांगें पूरी होने का आश्वासन मिलने तक पोस्टमार्टम के लिए तैयार नहीं था।
आंदोलन से जुड़े मामलों पर भी हुई बातचीत
बैठक में आंदोलन के दौरान दर्ज किए गए पुलिस मामलों को वापस लेने का मुद्दा भी उठाया गया। झोटा के पिता और प्रदर्शन में शामिल लोगों के खिलाफ दर्ज मामलों को लेकर सरकार की ओर से सकारात्मक आश्वासन दिया गया। इसके साथ ही लखविंदर सिंह उर्फ लखा सिधाना और मोहंजीत सिंह शेरों की रिहाई का मुद्दा भी चर्चा में रहा। सरकार के साथ बातचीत के बाद इंसाफ कमेटी ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के आवास के बाहर 5 नवंबर को प्रस्तावित घेराव का कार्यक्रम फिलहाल टाल दिया।
संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई, मेडिकल स्टोरों की भी जांच
इस मामले के बाद प्रशासनिक स्तर पर भी कार्रवाई की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, मानसा के थाना प्रभारी, डीएसपी और ड्रग इंस्पेक्टर को निलंबित किया गया है। सरकार ने मामले में अधिकारियों की भूमिका की जांच और नशे के कारोबार से जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई का भरोसा दिया है। बैठक में मेडिकल स्टोरों के खिलाफ की गई कार्रवाई का भी जिक्र हुआ। जानकारी के अनुसार, तीन मेडिकल स्टोरों के लाइसेंस रद्द किए गए, एक का लाइसेंस निलंबित किया गया और चार दुकानों को सील किया गया है।
सरकार और परिवार के बीच बनी सहमति के बाद अब पोस्टमार्टम और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद है। इस पूरे मामले में सरकार की ओर से किए गए वादों को जमीन पर लागू करना भी अहम रहेगा।









