फ्रांस में हिंसक प्रदर्शनों पर मैक्रों सख्त, गणराज्य को नुकसान पहुंचाने वालों को जवाबदेह ठहराया जाएगा

INTERNATIONAL DESK : फ्रांस में बढ़ती महंगाई, जीवन-यापन की लागत और स्कूलों की खराब परिस्थितियों को लेकर हुए देशव्यापी प्रदर्शनों के दौरान हिंसा और तोड़फोड़ की घटनाओं ने राजनीतिक माहौल को तनावपूर्ण बना दिया है। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने हिंसा, लूटपाट और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की चेतावनी दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि गणराज्य और उसकी संस्थाओं को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करने वालों को जवाबदेह ठहराया जाएगा।

मैक्रों ने रविवार को राष्ट्र के नाम संबोधन में कहा कि दुकानों में लूटपाट करने वालों को नुकसान की भरपाई करनी होगी। उन्होंने हिंसक घटनाओं की निंदा करते हुए कहा कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करना नागरिकों का अधिकार है, लेकिन हिंसा और सार्वजनिक संपत्ति को नष्ट करना किसी भी स्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता।

महंगाई और स्कूलों की स्थिति के खिलाफ सड़कों पर उतरे लोग

फ्रांस में 17 अक्टूबर को हुए प्रदर्शनों में छात्र संगठनों, श्रमिक यूनियनों और विभिन्न सामाजिक समूहों ने हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें बढ़ती महंगाई, जीवन-यापन के बढ़ते खर्च और स्कूलों में खराब परिस्थितियों से जुड़ी थीं। अधिकारियों के अनुसार, देशभर में लगभग 5.5 लाख लोगों ने प्रदर्शनों में भाग लिया, जबकि आयोजकों ने यह संख्या करीब 8 लाख बताई। शुरुआत में कई स्थानों पर प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे, लेकिन बाद में कुछ जगहों पर हालात बिगड़ गए और हिंसा, आगजनी तथा लूटपाट की घटनाएं सामने आईं।

कई शहरों में आगजनी और तोड़फोड़

हिंसा का असर पेरिस के अलावा मार्सिले, लियोन और अन्य शहरों में भी देखने को मिला। दुकानों में लूटपाट हुई और सार्वजनिक इमारतों को नुकसान पहुंचाया गया। मध्य फ्रांस के लिमोज शहर में ऐतिहासिक सिटी हॉल में आग लग गई। आग से इमारत की छत को गंभीर नुकसान पहुंचा।

पेरिस में कई दुकानों के शीशे टूटे मिले और सार्वजनिक स्थानों पर तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आईं। पुलिस ने हालात नियंत्रित करने के लिए कार्रवाई की। प्रदर्शनों के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें भी हुईं।

गिरफ्तारियों के बाद सरकार पर कार्रवाई का दबाव

हिंसा और लूटपाट के मामलों में बड़ी संख्या में लोगों को गिरफ्तार किया गया है। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों में गिरफ्तार लोगों की संख्या अलग-अलग बताई गई है। सरकार और पुलिस प्रशासन को सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा तथा हिंसक घटनाओं को रोकने के लिए कदम उठाने पड़ रहे हैं।

फ्रांस के आंतरिक मंत्री लॉरेंट नुनेज ने भी हिंसा की आलोचना करते हुए कहा कि विरोध प्रदर्शन का अधिकार मौलिक है, लेकिन जानबूझकर अव्यवस्था फैलाना स्वीकार्य नहीं है। सरकार ने स्थानीय प्रशासन और पुलिस को सार्वजनिक इमारतों तथा कारोबारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

राष्ट्रपति चुनाव से पहले बढ़ा राजनीतिक तनाव

फ्रांस में अगले राष्ट्रपति चुनाव से पहले इन घटनाओं ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। दक्षिणपंथी नेता मरीन ले पेन ने सरकार की प्रतिक्रिया की आलोचना की, जबकि वामपंथी नेता जां-ल्यूक मेलेंशों ने प्रधानमंत्री सेबास्टियन लेकोर्नू की रणनीति पर सवाल उठाए। राजनीतिक दलों के बीच हिंसा के कारणों और सरकार की भूमिका को लेकर मतभेद सामने आए हैं।

मैक्रों ने राजनीतिक नेताओं से हिंसा की स्पष्ट निंदा करने की अपील की। उन्होंने कहा कि देश में लोकतांत्रिक बहस और शांतिपूर्ण विरोध के लिए जगह होनी चाहिए, लेकिन हिंसा के जरिए राजनीतिक एजेंडा थोपने की अनुमति नहीं दी जा सकती। फ्रांस में जारी घटनाक्रम ने सरकार के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने, नागरिकों के विरोध के अधिकार की रक्षा करने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने की चुनौती खड़ी कर दी है।

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