जालंधर कांग्रेस भवन की दुकानों पर कार्रवाई का खतरा, जुर्माना भरने को तैयार पार्टी

 राजिंदर बेरी बोले- जरूरत पड़ी तो जाएंगे हाईकोर्ट

PUNJAB DESK :  कांग्रेस भवन परिसर में बनी दुकानों को लेकर चल रहा कानूनी विवाद एक बार फिर चर्चा में है। दुकानों को गिराने से संबंधित मामले में दुकानदारों की अपील खारिज होने के बाद वहां कार्रवाई की आशंका जताई जा रही है। इस बीच, कांग्रेस ने नियमों के तहत जुर्माना या कंपाउंडिंग फीस जमा कराने की पेशकश की है। जिला कांग्रेस प्रधान राजिंदर बेरी ने कहा है कि जरूरत पड़ने पर पार्टी इस मामले को लेकर हाईकोर्ट का रुख करेगी।

दुकानों को लेकर क्या है विवाद?

मामला जालंधर स्थित कांग्रेस भवन और उसके परिसर के बाहर बनी दुकानों से जुड़ा है। रिपोर्टों के अनुसार, निर्माण को लेकर कानूनी विवाद लंबे समय से चल रहा है और वर्ष 2016 में कांग्रेस भवन को गिराने के आदेश दिए गए थे। दुकानों से जुड़े पक्ष ने भी राहत पाने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन हालिया रिपोर्ट के मुताबिक उनकी याचिका खारिज हो गई। इस घटनाक्रम के बाद अब नगर निगम की अगली कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों में दुकानों को हटाने की कार्रवाई की कोई निश्चित तारीख सामने नहीं आई है।

कांग्रेस ने जुर्माना भरने का रखा प्रस्ताव

कांग्रेस जिला प्रधान राजिंदर बेरी के मुताबिक, पार्टी ने नगर निगम में आवेदन देकर नियमों के तहत कंपाउंडिंग फीस जमा कराने की पेशकश की है। रिपोर्ट के अनुसार, पार्टी ने स्थानीय निकाय कानून में किए गए संशोधन का हवाला दिया है, जिसमें निर्धारित शर्तों के अधीन पुराने निर्माण को फीस लेकर नियमित करने का प्रावधान बताया गया है।

कांग्रेस का कहना है कि दुकानों में कई दुकानदार लंबे समय से कारोबार कर रहे हैं और उनकी रोजी-रोटी इन दुकानों पर निर्भर है। पार्टी ने दुकानदारों को कानूनी और प्रशासनिक सहायता देने की बात भी कही है। ये पार्टी की ओर से रखे गए पक्ष हैं; प्रस्ताव पर नगर निगम का अंतिम फैसला सामने आना बाकी है।

जरूरत पड़ी तो हाईकोर्ट जाएगी कांग्रेस

राजिंदर बेरी के अनुसार, यदि नगर निगम कंपाउंडिंग फीस के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करता या कार्रवाई आगे बढ़ाता है, तो कांग्रेस उपलब्ध कानूनी विकल्पों पर विचार करेगी और जरूरत पड़ने पर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी। पार्टी का कहना है कि वह दुकानदारों के रोजगार और कांग्रेस भवन से जुड़े विवाद का समाधान कानूनी प्रक्रिया के तहत चाहती है।

अब नगर निगम के फैसले पर टिकी नजर

दुकानदारों की याचिका खारिज होने के बाद इस मामले में आगे की प्रक्रिया महत्वपूर्ण हो गई है। एक तरफ कांग्रेस ने फीस जमा कराकर विवाद सुलझाने का प्रस्ताव रखा है, वहीं दूसरी ओर निर्माण हटाने से जुड़े पुराने आदेशों के क्रियान्वयन का सवाल है। फिलहाल, नगर निगम की ओर से कार्रवाई की निश्चित तारीख या कंपाउंडिंग फीस के प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय की पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है। ऐसे में आगे की स्थिति निगम के फैसले और मामले में अपनाए जाने वाले कानूनी विकल्पों पर निर्भर करेगी।

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