PUNJAB DESK: लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (एलपीयू) को पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता को बढ़ावा देने के प्रयासों के लिए प्लेटिनम ग्रीन इम्पैक्ट अवॉर्ड 2026 से सम्मानित किया गया है। यह पुरस्कार नेशनल एडुट्रस्ट ऑफ इंडिया की ओर से आयोजित ‘सीड बॉल्स फॉर सस्टेनेबल कैंपसेज़ इनिशिएटिव 2026’ के तहत दिया गया। इस अभियान में एलपीयू के 422 विद्यार्थियों ने हिस्सा लेकर 11 वृक्ष प्रजातियों के बीजों से कुल 8,572 सीड बॉल तैयार किए।
विश्वविद्यालय की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, इन सीड बॉल को पंजाब के कपूरथला, अमृतसर और शहीद भगत सिंह नगर जिलों में पांच जियो-टैग किए गए स्थानों पर फैलाया गया। इस पहल का उद्देश्य स्थानीय पेड़-पौधों को बढ़ावा देना, जैव विविधता के संरक्षण में योगदान देना और विद्यार्थियों को पर्यावरण से जुड़े कार्यों में सक्रिय रूप से शामिल करना था।
स्थानीय वृक्ष प्रजातियों को दी प्राथमिकता
एलपीयू द्वारा तैयार किए गए 8,572 सीड बॉल में से 7,643 में स्थानीय मूल प्रजातियों के बीज इस्तेमाल किए गए, जो कुल संख्या का लगभग 89.2 प्रतिशत है। शेष 929 सीड बॉल में अन्य प्रजातियों के बीज शामिल थे। स्थानीय प्रजातियों में करंज, शीशम, अमलतास, कचनार, सहजन, कदंब, जामुन और अर्जुन शामिल रहे। इसके अलावा इमली, गुलमोहर और पिंक शावर के बीजों का भी इस्तेमाल किया गया।
130 किलोमीटर के हरित गलियारों में पहुंची पहल
विश्वविद्यालय के अनुसार, कुल तैयार सीड बॉल में से 6,072 को अलग-अलग स्थानों पर फैलाया गया, जबकि 2,500 को ‘ग्रीन गिफ्ट’ पैकेट के माध्यम से वितरित किया गया। अभियान के अंतर्गत फगवाड़ा स्थित एलपीयू परिसर और आसपास के क्षेत्र, कपूरथला में एएच1 कॉरिडोर, ब्यास के पास बूढ़ा थेह, अमृतसर में एएच1 कॉरिडोर पर लाहोरीमल और बलाचौर में चंडीगढ़-जालंधर एक्सप्रेसवे के स्थान शामिल रहे।
इन स्थानों के माध्यम से लगभग 130 किलोमीटर के हरित गलियारों को कवर किया गया। इनमें परिसर के हरित क्षेत्र, राजमार्गों के किनारे की जमीन, नदी तटबंध, सड़क किनारे की पट्टियां और एक्सप्रेसवे के हरित क्षेत्र शामिल थे।
27 अकादमिक स्कूलों के विद्यार्थियों ने लिया भाग
इस अभियान में एलपीयू के 27 अकादमिक स्कूलों के विद्यार्थियों ने भागीदारी की। सीड बॉल तैयार करने और उन्हें फैलाने के साथ पर्यावरणीय जिम्मेदारी, जैव विविधता और जलवायु कार्रवाई पर पांच जागरूकता गतिविधियां भी आयोजित की गईं। नेशनल एडुट्रस्ट ऑफ इंडिया के इस राष्ट्रव्यापी अभियान में करीब 350 संस्थानों ने हिस्सा लिया। सभी संस्थानों ने मिलकर 10 लाख से अधिक सीड बॉल तैयार किए और उनमें से लगभग आठ लाख को विभिन्न स्थानों पर फैलाया।
डॉ. अशोक कुमार मित्तल ने कही यह बात
एलपीयू के संस्थापक कुलाधिपति और राज्यसभा सांसद डॉ. अशोक कुमार मित्तल ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण को केवल कक्षाओं और संस्थागत रिपोर्टों तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। इसे जमीन पर किए जाने वाले कार्यों, समुदायों और दैनिक जीवन के फैसलों से जोड़ना जरूरी है। उन्होंने इस पुरस्कार को विद्यार्थियों की भागीदारी और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी की भावना की पहचान बताया। विश्वविद्यालय के अनुसार, एलपीयू को वर्ष 2026 में टाइम्स हायर एजुकेशन सस्टेनेबिलिटी इम्पैक्ट रैंकिंग्स में भी मान्यता मिली थी। विश्वविद्यालय ने बताया कि उसे इस रैंकिंग में वैश्विक स्तर पर 23वां स्थान प्राप्त हुआ था।









