PUNJAB DESK : पंजाब में रविवार को हुई बेमौसम बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। दोआबा क्षेत्र में कई जगह खेतों में खड़ी धान की फसल गिरने की खबर है, जबकि जालंधर की अनाज मंडियों में खुले में रखा धान बारिश से भीग गया। किसानों को आशंका है कि इससे फसल की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है और कटाई से लेकर सरकारी खरीद तक की प्रक्रिया में देरी हो सकती है। बारिश के बाद मंडियों में किसान अपने धान को तिरपाल से ढककर बचाने की कोशिश करते दिखाई दिए। हालांकि, खुले स्थानों पर जगह की कमी और जमीन पर जमा पानी के कारण धान को भीगने से पूरी तरह बचाना मुश्किल रहा। अब अनाज को सुखाने में अतिरिक्त समय लग सकता है।
खेतों में गिरी फसल से कटाई की लागत बढ़ने की आशंका
जालंधर ईस्ट ब्लॉक के किसान कुलविंदर सिंह मचियाना के अनुसार, फसल गिरने से कटाई में अधिक मेहनत और मजदूरी की जरूरत पड़ सकती है। उन्होंने आशंका जताई कि धान के दानों का रंग बदलने या गुणवत्ता प्रभावित होने पर आढ़ती और राइस मिलर कम कीमत दे सकते हैं। मुख्य कृषि अधिकारी रणधीर ठाकुर ने बताया कि बेमौसम बारिश फसलों के लिए अनुकूल नहीं है। जालंधर के कुछ इलाकों में धान की फसल गिरने की सूचना मिली है, हालांकि उस समय तक फसल के नुकसान की आधिकारिक रिपोर्ट सामने नहीं आई थी। उन्होंने कहा कि बारिश से कटाई में देरी हो सकती है और लगातार बारिश होने पर दानों का रंग प्रभावित होने का खतरा है।
मंडियों में खरीद और उठान प्रभावित
बारिश के कारण मंडियों में रखे धान को सुखाने में भी परेशानी आ सकती है। जालंधर के जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक हरशरणजीत सिंह बराड़ के मुताबिक, रविवार की बारिश के चलते खरीदे जा चुके धान का उठान रोकना पड़ा। किसान सलविंदर सिंह ने कहा कि अधिक नमी के कारण धान के लिए केंद्र सरकार की निर्धारित 17 प्रतिशत नमी सीमा के भीतर रहना मुश्किल हो सकता है। उन्होंने खरीद के लिए नमी की सीमा बढ़ाकर 22 प्रतिशत करने की मांग की।
किसानों ने मुआवजे की मांग उठाई
बारिश और ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों के लिए किसान संगठनों ने मुआवजे की मांग की है। ऑल इंडिया किसान महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सतनाम सिंह अजनाला और जम्हूरी किसान सभा पंजाब के राज्य महासचिव कुलवंत सिंह संधू ने प्रभावित किसानों को 100 प्रतिशत मुआवजा देने की मांग उठाई। संगठनों ने धान की खरीद में 22 प्रतिशत तक नमी की अनुमति देने और राहत राशि जल्द जारी करने की मांग भी की। जम्हूरी किसान सभा पंजाब के प्रेस सचिव हरनेक सिंह गुज्जरवाल ने प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए प्रत्येक खेत को इकाई मानकर फसल बीमा योजना लागू करने की मांग की।









