ENTERTAINMENT DESK : बॉलीवुड अभिनेता संजय दत्त अपने एक बयान को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा में आ गए हैं। शेखर सुमन के शो ‘Shekhar Tonite’ के गांधी जयंती विशेष एपिसोड में देश में शांति को लेकर की गई उनकी टिप्पणी पर सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं सामने आईं। इसके बाद अभिनेता ने सफाई जारी करते हुए कहा कि उनकी बात को मूल संदर्भ से अलग समझा गया।
क्या कहा था संजय दत्त ने?
शो के दौरान संजय दत्त ने भारत के लोगों की तारीफ करते हुए देश में शांति की जरूरत की बात कही। इसी बातचीत में उन्होंने कहा कि उन्हें अब देश में पहले जैसी शांति महसूस नहीं होती और उम्मीद जताई कि वह दौर फिर लौटेगा। उनके इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया और इसे लेकर उन्हें आलोचना का सामना करना पड़ा।
विवाद बढ़ने के बाद अभिनेता ने दी सफाई
बयान पर प्रतिक्रिया बढ़ने के बाद संजय दत्त ने 4 अक्टूबर 2026 को X पर एक स्पष्टीकरण जारी किया। उन्होंने कहा कि उनकी बात किसी व्यक्ति, समुदाय या संस्था की भावनाओं को ठेस पहुंचाने के इरादे से नहीं कही गई थी। अभिनेता के मुताबिक, शो में हुई बातचीत पहले से तैयार यानी scripted थी और उसका उद्देश्य हल्का-फुल्का हास्य और व्यंग्य था। उन्होंने कहा कि उनकी बात को उस संदर्भ से हटकर समझा गया, जिसमें वह कही गई थी।
‘Munna Bhai’ और ‘Gandhigiri’ से जोड़ा बयान
संजय दत्त ने अपनी सफाई में अपने चर्चित किरदार ‘मुन्ना भाई’ और फिल्मों में दिखाए गए ‘गांधीगिरी’ के विचार का भी संदर्भ दिया। उन्होंने कहा कि बातचीत का भाव प्यार, अपनापन, एकजुटता और सद्भावना से जुड़ा था। शो में भी अभिनेता ने अपने ‘मुन्ना भाई’ अंदाज में देश और राजनीति को लेकर कई हल्के-फुल्के जवाब दिए थे। उन्होंने प्रधानमंत्री बनने की काल्पनिक स्थिति पर बात करते हुए देश में भाईचारे और गांधीजी के विचारों से जुड़े मुद्दों का जिक्र किया।
सोशल मीडिया पर क्यों हुआ विवाद?
संजय दत्त की ‘भारत में शांति महसूस नहीं होती’ वाली टिप्पणी का एक हिस्सा सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। इसी के बाद उनके बयान को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं। अभिनेता ने बाद में स्पष्ट किया कि उनके शब्दों को उस मूल बातचीत के संदर्भ में देखा जाना चाहिए, जिसमें वह हिस्सा बोला गया था। फिलहाल संजय दत्त की सफाई के बाद विवाद का केंद्र उनके मूल बयान और उसके संदर्भ को लेकर है। अभिनेता ने स्पष्ट किया है कि उनका उद्देश्य किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना या किसी व्यक्ति, समुदाय अथवा संस्था का अपमान करना नहीं था।









