‘एझु कडल एझु मलाई’ एक अनोखी फैंटेसी-ड्रामा, कहानी के जरिए उठाती है जिंदगी और इंसानियत से जुड़े बड़े सवाल

ENTERTAINMENT DESK : निर्देशक राम की फिल्म ‘एझु कडल एझु मलाई’ एक अलग तरह की फैंटेसी-ड्रामा फिल्म है, जो एक काल्पनिक कहानी के माध्यम से जिंदगी, प्यार, इंसानियत और इंसानी अस्तित्व जैसे बड़े विषयों को सामने लाती है। फिल्म में निविन पॉली एक ऐसे व्यक्ति की भूमिका निभा रहे हैं, जो हजारों साल से जीवित है। उनका किरदार खुद की उम्र करीब 8,000 साल बताता है, हालांकि उसकी वास्तविक उम्र को लेकर कहानी में रहस्य बना रहता है। वहीं, सूरी एक आम इंसान की भूमिका में हैं, जो अपने परिवार के लिए मेहनत करता है और जिसकी दुनिया मुख्य रूप से अपने करीबियों तक सीमित है। फिल्म की कहानी सूरी के किरदार में आने वाले बदलाव के साथ आगे बढ़ती है।

फिल्म में निविन पॉली के किरदार का एक महिला, यानी अंजलि द्वारा निभाए गए किरदार से गहरा प्रेम भी दिखाया गया है। यह प्रेम कई जन्मों तक जारी रहता है और कहानी को एक भावनात्मक तथा काल्पनिक मोड़ देता है। इसके साथ ही फिल्म में एक चूहे की जिंदगी को भी अहमियत दी गई है और उसकी जिंदगी की तुलना इंसान के जीवन से करते हुए यह सवाल उठाया गया है कि क्या किसी एक जीवन का मूल्य दूसरे से अधिक हो सकता है। फिल्म की कहानी एक लोककथा या परीकथा की तरह पेश की गई है। इसकी शुरुआत एक अनाथ बच्चे और उसके देखभाल करने वाले व्यक्ति की आवाजों से होती है, जो पर्दे पर दिखाई नहीं देते। उनके बीच कहानी सुनाने का यह अंदाज फिल्म को एक कालातीत एहसास देता है, मानो यह कहानी मानव सभ्यता की शुरुआत से कही जाती रही हो।

फिल्म की दुनिया में हजारों साल से जीवित व्यक्ति अपनी सपनों में मिलने वाली महिला की तलाश में रहता है और ज्यादातर समय सोता हुआ नजर आता है। कहानी में उसके किरदार को हर जगह मौजूद दिखाने के साथ कई प्रतीकात्मक दृश्यों और विचारों का इस्तेमाल किया गया है। फिल्म की खासियत इसका प्रयोगात्मक अंदाज और बड़े विषयों को एक साधारण कहानी के रूप में पेश करना है। हालांकि, इसमें कई विचार एक साथ शामिल होने के कारण कहानी कुछ जगहों पर जरूरत से ज्यादा भरी हुई महसूस होती है। इसके भावनात्मक पहलू भी दर्शकों से पूरी तरह जुड़ नहीं पाते। इसके बावजूद फिल्म अपने कॉन्सेप्ट, कल्पनाशीलता और संवेदनशील विषयों के कारण सोचने पर मजबूर करती है। निर्देशक राम की अन्य फिल्मों की तरह इसमें भी भावनाओं को प्रभावशाली तरीके से पेश करने की कोशिश की गई है, हालांकि कुछ हिस्सों में कहानी का अंदाज जरूरत से ज्यादा गंभीर और सीधा महसूस हो सकता है।

‘एझु कडल एझु मलाई’ को एक ऐसी फैंटेसी-ड्रामा के रूप में देखा जा सकता है, जो मनोरंजन के साथ-साथ जीवन और इंसानियत के बारे में कई सवाल भी उठाती है। फिल्म की कहानी, किरदार और प्रतीकात्मक दृश्य इसे पारंपरिक फिल्मों से अलग बनाते हैं।

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