PUNJAB DESK : पंजाब विधानसभा के दूसरे दिन नशे के मुद्दे और राज्य की कानून-व्यवस्था को लेकर सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (AAP) और कांग्रेस के बीच तीखी बहस देखने को मिली। कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ ‘लानत पत्र’ जारी कर अपना विरोध दर्ज कराया। इसी दौरान कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैहरा को विधानसभा के मौजूदा सत्र की बाकी अवधि के लिए निलंबित करने का प्रस्ताव पारित किया गया।
नशे के मुद्दे पर कांग्रेस ने सरकार को घेरा
कांग्रेस विधायकों ने पंजाब में नशे की समस्या और नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या का मामला उठाते हुए सरकार से जवाब मांगा। नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष परगट सिंह के नेतृत्व में पार्टी के विधायक काले स्कार्फ पहनकर सदन के वेल में पहुंचे और नारेबाजी की। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार नशे के कारोबार और गैंगस्टर गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित नहीं कर पाई है। पार्टी ने मुख्यमंत्री भगवंत मान से इस्तीफे की मांग भी की।
‘लानत पत्र’ को लेकर सदन में हंगामा
कांग्रेस विधायकों ने स्पीकर कुलतार सिंह संधवां से सरकार के खिलाफ तैयार किया गया ‘लानत पत्र’ स्वीकार करने की मांग की। सदन में विरोध जारी रहने पर स्पीकर ने सदस्यों से कार्यवाही सुचारू रूप से चलने देने की अपील की। हालांकि, दोनों पक्षों के बीच नारेबाजी जारी रही। इसके बाद कांग्रेस विधायकों ने सदन से वॉकआउट कर दिया। विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार अहम जनहित के मुद्दों पर चर्चा से बच रही है।
हरपाल चीमा के प्रस्ताव के बाद खैहरा पर कार्रवाई
वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैहरा के खिलाफ प्रस्ताव पेश किया। चीमा ने आरोप लगाया कि खैहरा ने स्पीकर के प्रति अनुचित भाषा का इस्तेमाल किया और सदन के निर्देशों का पालन नहीं किया। प्रस्ताव पारित होने के बाद खैहरा को मौजूदा सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित कर दिया गया। यह कार्रवाई उस समय हुई जब कांग्रेस विधायक सदन से बाहर जा चुके थे। खैहरा ने इस फैसले पर आपत्ति जताते हुए इसे राजनीतिक कार्रवाई बताया।
नशे की समस्या पर आरोप-प्रत्यारोप जारी
विधानसभा में बहस के दौरान हरपाल सिंह चीमा ने कांग्रेस के पिछले शासनकाल को लेकर सवाल उठाए। दूसरी ओर, कांग्रेस ने मौजूदा सरकार को नशे और कानून-व्यवस्था के मामलों में जवाबदेह ठहराया। नशे की समस्या और प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर सत्ता पक्ष तथा विपक्ष के बीच मतभेद सदन की कार्यवाही पर हावी रहे। विधानसभा का यह दिन राजनीतिक आरोपों, विरोध और निलंबन की कार्रवाई के कारण चर्चा में रहा।









