PUNJAB DESK : पंजाब के लुधियाना में बुद्धा नाला की सफाई और बढ़ते प्रदूषण को लेकर आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने संबंधित अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने चिंता जताई कि बार-बार बैठकें होने और निर्देश जारी किए जाने के बावजूद नाले में गंदा पानी और पशु अपशिष्ट पहुंचने की समस्या पर पूरी तरह लगाम क्यों नहीं लग पाई है।
लगातार प्रयासों के बाद भी प्रदूषण पर नियंत्रण चुनौती
बुद्धा नाला लंबे समय से घरेलू सीवेज, डेयरी कचरे और औद्योगिक अपशिष्ट के कारण प्रदूषण की समस्या का सामना कर रहा है। इसे साफ करने के लिए प्रशासन की ओर से कई बार बैठकें और निरीक्षण किए गए हैं। इसके बावजूद प्रदूषण के स्रोतों पर प्रभावी रोक लगाने को लेकर सवाल बने हुए हैं। सीचेवाल ने जोर दिया कि केवल बैठकों और आदेशों से नाले की स्थिति नहीं सुधरेगी। इसके लिए संबंधित विभागों को मौके पर कार्रवाई करनी होगी और तय करना होगा कि जिम्मेदार अधिकारी अपने कार्यों को समय पर पूरा करें।
डेयरी कचरे और ट्रीटमेंट प्लांट की व्यवस्था पर सवाल
बुद्धा नाला में गंदगी पहुंचने की प्रमुख वजहों में डेयरी इकाइयों से निकलने वाला गोबर, दूषित पानी और औद्योगिक अपशिष्ट शामिल हैं। पहले हुए निरीक्षणों के दौरान हैबोवाल डेयरी कॉम्प्लेक्स के एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ETP) के बंद होने और ताजपुर डेयरी कॉम्प्लेक्स में पशु अपशिष्ट के निपटारे से संबंधित समस्याओं पर भी चिंता जताई गई थी। यदि इन इकाइयों से निकलने वाले अपशिष्ट का उचित उपचार नहीं होता, तो उसके नाले में पहुंचने का खतरा बना रहता है। ऐसे में सीचेवाल ने संबंधित विभागों से व्यवस्थाओं में सुधार करने और प्रदूषण के स्रोतों को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने की जरूरत बताई।
विभागों के बीच तालमेल और जवाबदेही पर जोर
सांसद ने कहा कि पहले जारी किए गए निर्देशों पर हुई कार्रवाई की समीक्षा होनी चाहिए। प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े विभागों के बीच बेहतर समन्वय और लंबित कामों को निर्धारित समयसीमा में पूरा करना जरूरी है। सीचेवाल लंबे समय से बुद्धा नाला की सफाई के मुद्दे को उठाते रहे हैं। उनका जोर इस बात पर है कि नाले को साफ करने के लिए केवल सफाई अभियान चलाना पर्याप्त नहीं, बल्कि उसमें गंदा पानी और कचरा पहुंचने के रास्तों को भी बंद करना होगा।
सतलुज नदी की जल गुणवत्ता से भी जुड़ा है मामला
बुद्धा नाला आगे जाकर सतलुज नदी से जुड़ता है। इसलिए इसमें गिरने वाले दूषित पानी और कचरे को नियंत्रित करना लुधियाना के साथ-साथ पर्यावरण और जल गुणवत्ता के लिहाज से भी अहम है। अब सफाई अभियान की प्रभावशीलता इस बात पर निर्भर करेगी कि संबंधित विभाग प्रदूषण के स्रोतों पर कितनी सख्ती से रोक लगाते हैं, ट्रीटमेंट प्लांट नियमित रूप से चलाए जाते हैं या नहीं और नियमों का उल्लंघन करने वाली इकाइयों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।









