PUNJAB DESK : जालंधर कैंट की प्रस्तावित पेरीफेरी रोड का निर्माण पूरा करवाने की मांग एक बार फिर उठी है। इस मुद्दे को लेकर आसपास के इलाकों के प्रतिनिधिमंडल ने पार्षद बलराज ठाकुर के नेतृत्व में डिप्टी कमिश्नर (DC) को पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नाम मांगपत्र सौंपा। लोगों ने सितंबर 2022 से लंबित इस परियोजना को जल्द पूरा करवाने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो बड़ा संघर्ष शुरू किया जाएगा।
यह जानकारी जारी प्रेस नोट के अनुसार है। मांगपत्र में मुख्यमंत्री से लोगों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए परियोजना पर जल्द निर्णय लेने और निर्माण कार्य आगे बढ़ाने की अपील की गई है। इस पहल को पूर्व सैनिकों की सर्व सांझी कमेटी का भी समर्थन मिलने की बात कही गई है।
क्या है जालंधर कैंट पेरीफेरी रोड परियोजना?
प्रेस नोट के मुताबिक, प्रस्तावित पेरीफेरी रोड की लंबाई करीब 12 किलोमीटर है। इसका उद्देश्य जालंधर कैंट के आसपास के गांवों और रिहायशी इलाकों के लिए संपर्क मार्ग उपलब्ध करवाना है। प्रस्तावित सड़क अटवाल हाउस से शुरू होकर जसवंत नगर, गढ़ा, सुबाना, धीणा, संसारपुर, अलादीनपुर, खुसरोपुर, सोफी पिंड, नंगर करार खां, दीप नगर और वडिंग से गुजरते हुए जीटी रोड से जुड़नी है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, इस मार्ग के कुछ हिस्सों का इस्तेमाल पहले आसपास के क्षेत्रों में आने-जाने के लिए किया जाता था। क्षेत्र में रक्षा विभाग की जमीन और कैंटोनमेंट क्षेत्र से जुड़े मामलों के कारण सड़क को लेकर विवाद पैदा हुआ।
2007 में शुरू हुआ था विवाद
प्रेस नोट में दी गई जानकारी के अनुसार, वर्ष 2007 में सेना की ओर से इस रास्ते को बंद करने के लिए दीवार बनाने का काम शुरू किया गया था। स्थानीय लोगों ने इसका विरोध किया, क्योंकि कुछ घरों के दरवाजे इसी रास्ते की ओर खुलते थे। इसके बाद कुछ हिस्सों में दीवार बनाकर रास्ता बंद कर दिया गया, जबकि अन्य हिस्सों में कच्ची सड़क मौजूद रही।
विरोध के बाद मामला पंजाब सरकार और संबंधित सैन्य अधिकारियों के बीच चर्चा तक पहुंचा। प्रेस नोट के मुताबिक, बैठकों के दौरान जमीन के बदले जमीन या उसके मूल्य के भुगतान के विकल्प पर विचार किया गया था। हालांकि, इस संबंध में अंतिम समझौते या मौजूदा आधिकारिक स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
सितंबर 2022 से आगे नहीं बढ़ा मामला
स्थानीय प्रतिनिधियों का कहना है कि सितंबर 2022 के बाद से परियोजना को लेकर कोई ठोस प्रगति नहीं हुई। इसी कारण अब क्षेत्र के लोगों ने प्रशासन के माध्यम से मुख्यमंत्री तक अपनी मांग पहुंचाई है।
लोगों का मानना है कि सड़क बनने से आसपास के गांवों और रिहायशी क्षेत्रों के निवासियों को आवागमन में सुविधा मिल सकती है। प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन से जमीन से जुड़े मुद्दों का समाधान निकालकर परियोजना को आगे बढ़ाने की अपील की।
समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन की चेतावनी
मांगपत्र सौंपने के दौरान क्षेत्रवासियों ने कहा कि यदि पेरीफेरी रोड के मुद्दे का जल्द समाधान नहीं किया गया, तो वे बड़े स्तर पर संघर्ष करने के लिए मजबूर होंगे। इस मौके पर राम प्रकाश सहदेव, कैप्टन मनजीत सिंह, हरविंदर सेतिया, परमिंदर कौर, पवन कुमार, अजीत वालिया, सूबेदार राजिंदर सिंह, सूबेदार बलदेव सिंह, गुरप्रीत सिंह सिद्धू, रविंदर चौधरी, बलबीर सिंह, सुरिंदर सिंह मुल्तानी, महेश विक्की और विनोद कुमार सहित अन्य लोग मौजूद रहे। प्रेस नोट के अनुसार, इस दौरान बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी भी उपस्थित थे।









