PUNJAB DESK: पंजाब के जालंधर में कांग्रेस भवन और उसके आसपास बनी दुकानों से जुड़े विवाद में अदालत के फैसले के बाद मामला फिर सुर्खियों में है। मार्केट के दुकानदारों को अदालत से राहत नहीं मिली है। उनकी याचिका खारिज होने के बाद अब इस मामले में आगे की कार्रवाई को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
क्या है पूरा मामला?
कांग्रेस भवन की जमीन और वहां हुए निर्माण को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, संबंधित जमीन सरकारी रिकॉर्ड में खाली प्लॉट के तौर पर दर्ज थी। इसी जमीन पर कांग्रेस भवन बनाया गया और इसके बाहर मार्केट भी विकसित हुई। निर्माण को लेकर मामला अदालत तक पहुंचा था। बताया गया है कि वर्ष 2016 में अदालत ने कांग्रेस भवन को गिराने के आदेश दिए थे। हालांकि, इन आदेशों पर अब तक कार्रवाई नहीं हो पाई थी। इसी बीच, मार्केट के दुकानदारों ने अपने हितों की रक्षा और राहत की मांग को लेकर अदालत में याचिका दायर की थी।
दुकानदारों की याचिका पर क्या हुआ?
इस मामले में अदालत ने दुकानदारों की याचिका खारिज कर दी। इसके बाद अब सबकी नजर इस बात पर है कि पहले से जारी आदेशों को लागू करने के लिए संबंधित प्रशासन क्या कदम उठाता है। इस घटनाक्रम का असर कांग्रेस भवन के बाहर बनी मार्केट पर भी पड़ सकता है। हालांकि, दुकानों को हटाने या तोड़ने की कार्रवाई कब होगी, इस बारे में अभी किसी निश्चित तारीख की पुष्टि नहीं हुई है।
अब नगर निगम की कार्रवाई का इंतजार
अदालत के फैसले के बाद मामले में अगला कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब यह देखना होगा कि नगर निगम वर्ष 2016 के आदेशों पर अमल करने के लिए क्या प्रक्रिया अपनाता है और कार्रवाई को लेकर कोई आधिकारिक कार्यक्रम कब जारी किया जाता है। फिलहाल, दुकानदारों की याचिका खारिज होने के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है। आगे की स्थिति प्रशासनिक कार्रवाई और संबंधित अधिकारियों के फैसलों पर निर्भर करेगी।









