PUNJAB DESK : पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान कांग्रेस विधायकों को सदन में प्रवेश से रोके जाने और विधायक सुखपाल सिंह खैहरा के निलंबन को लेकर राजनीतिक विवाद सामने आया है। पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष सरदार परगट सिंह ने इन घटनाओं पर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार से जवाब मांगा है।
परगट सिंह ने आरोप लगाया कि विपक्षी विधायकों को विधानसभा में अपनी बात रखने से रोकना लोकतांत्रिक व्यवस्था के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा कि विपक्ष का काम जनता से जुड़े मुद्दों को उठाना और सरकार से जवाब मांगना है, लेकिन मौजूदा घटनाओं ने इस भूमिका को लेकर चिंता पैदा की है।
जल अधिकारों पर कांग्रेस ने उठाए सवाल
कांग्रेस अध्यक्ष ने पंजाब के पानी से जुड़े मुद्दों पर सरकार की नीति को लेकर सवाल किए। उन्होंने कहा कि राज्य के जल अधिकारों की रक्षा के लिए केवल विधानसभा में प्रस्ताव पारित करना पर्याप्त नहीं है। सरकार को कानूनी स्तर पर भी ठोस कदम उठाने चाहिए और अदालतों में पंजाब का पक्ष प्रभावी ढंग से रखना चाहिए। उन्होंने राजस्थान को पानी देने के मुद्दे पर पहले लाए गए प्रस्तावों का जिक्र करते हुए सरकार से अपनी आगे की रणनीति स्पष्ट करने की मांग की।
BSF और डैम सेफ्टी एक्ट पर भी जवाब मांगा
परगट सिंह ने सीमा सुरक्षा बल (BSF) के अधिकार क्षेत्र को 50 किलोमीटर तक बढ़ाने के फैसले और डैम सेफ्टी एक्ट से जुड़े मुद्दों पर भी सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि पंजाब के अधिकारों से जुड़े मामलों में कानूनी पैरवी और कार्रवाई स्पष्ट होनी चाहिए।
बेअदबी के मामलों में कार्रवाई पर सवाल
बेअदबी के मामलों का जिक्र करते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि इन घटनाओं में न्याय सुनिश्चित करना राज्य के लोगों की भावनाओं से जुड़ा विषय है। उन्होंने सरकार से संबंधित मामलों में कानूनी कार्रवाई और पैरवी की स्थिति स्पष्ट करने को कहा।
लैंड पूलिंग नीति का विरोध जारी रखने की बात
पंजाब सरकार की लैंड पूलिंग नीति पर आपत्ति जताते हुए परगट सिंह ने आरोप लगाया कि इससे किसानों की जमीन और आजीविका प्रभावित हो सकती है। उन्होंने कहा कि किसानों के हितों और उनकी सहमति को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि पार्टी किसानों के हितों की रक्षा के लिए इस नीति का विरोध जारी रखेगी। उन्होंने यह भी दावा किया कि पंजाब के लोग 2027 के विधानसभा चुनाव में सरकार के कामकाज का आकलन करेंगे। यह बयान कांग्रेस की ओर से जारी प्रेस नोट पर आधारित है। इसमें लगाए गए राजनीतिक आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है और आम आदमी पार्टी सरकार का पक्ष भी इस सामग्री में शामिल नहीं है।









